News

Tuesday, 18 October 2011

Lifer at the fag end of life for burning daughter in law

Oh yes,this is the true story! Read the truth and fearless comments Read the national and Varanasi news at cleanmediatoday.blogspot.com


  • पंद्रह वर्ष बाद पुत्रवधू को जलाकर मारने के लिए 95 वर्षीय महिला को आजीवन कारावास
  • क्लीन मीडिया संवाददाता 
नयी दिल्ली, 18 अक्तूबर - दिल्ली उच्च न्यायालय ने 95 वर्षीय एक महिला को अपनी पुत्रवधू और सात माह के पौत्र को जलाकर मारने के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। यह सजा दहेज प्रताड़ना के मामले में निचली अदालत द्वारा महिला को बरी किए जाने के 13 साल बाद सुनाई गई।

न्यायमूर्ति प्रदीप नंदराजोग और न्यायमूर्ति सुनील गौर की पीठ ने सुमित्रा को अपने बड़े बेटे और पुत्रवधू के साथ मिलकर दोहरे हत्याकांड को अंजाम देने का दोषी ठहराया। अदालत ने निचली अदालत के 1998 के आदेश को निरस्त कर दिया जिसमें तीनों को बरी कर दिया गया था।

अपराध के समय बच्चा अपनी मां की गोद में था।

दोषी महिला के बड़े बेटे और पुत्रवधू की हालांकि इस साल की शुरूआत में मौत हो गई। उन दोनों की मौत उन्हें बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ दिल्ली पुलिस की अपील पर उच्च न्यायालय के सुनवाई पूरी करने से पहले हो गई।

पीड़िता मीनू के मृत्यु पूर्व बयान पर भरोसा करते हुए उच्च न्यायालय ने सुमित्रा को दोषी ठहराया। उन्होंने उपसंभागीय मजिस्ट्रेट से कहा था कि उनकी सास ने अपने बड़े बेटे और पुत्रवधू के साथ मिलकर उसपर मिट्टी का तेल छिड़कने के बाद उसके शरीर में आग लगा दी थी। उस वक्त उनकी गोद में उनका बेटा था।

मीनू ने कहा था कि उसके पति और उसके ससुर ने उसे कभी प्रताड़ित नहीं किया लेकिन उसकी सास और जेठ और जेठानी दहेज के लिए उसे प्रताड़ित करते थे और उन्होंने 20 मार्च 1996 को उसके और उसके पुत्र के शरीर में आग लगा दी।

1 comment:

  1. what our law is doing?
    If a 95 year old woman is sent for lifer, what does it mean for her...?
    Justice is done but it is a little too late. isn't it?
    Rakhi.
    Delhi

    ReplyDelete