- ‘तुम इतना जो मुस्कुरा... ’ : एक मखमली आवाज का खामोश होना
- सीएमसी संवाददता
मुंबई, दस अक्तूबर - हरफों को अपनी मखमली आवाज से रेशम की डोर में पिरो, गजल गायिकी को एक नया मुकाम देने वाली रूमानी शख्सियत जगजीत सिंह की आवाज आज खामोश हो गयी । इस क्षति पर देशभर में शोक की लहर है ।
राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह , फिल्म जगत की जानी मानी हस्तियों समेत विभिन्न राजनेताओं ने इसे अपूर्णीय क्षति करार देते हुए गहरी संवेदना जाहिर की है ।
प्रतिभा पाटिल ने उनकी पत्नी चित्रा के नाम अपने संवेदना संदेश में कहा,‘‘गजल सम्राट के रूप में मशहूर जगजीत सिंह का दिल भी बहुत बड़ा था और इसी के चलते वह धर्मार्थ कार्यो में भी लगे थे ।’’ जगजीत सिंह के मुरीदों में शामिल प्रधानमंत्री ने अपने शोक संदेश में कहा है कि उन्हें कुदरत ने सुनहरी आवाज दी थी जिसके जरिए उन्होंने करोड़ों संगीत प्रेमियों पर यह दौलत लुटायी ।
वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी और पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने गजल सम्राट के निधन को राष्ट्र और इसकी संस्कृति के प्रति बड़ी क्षति करार दिया।
महान गजल गायक जगजीत सिंह का ब्रेन हेमरेज के चलते आज निधन हो गया और उसी के साथ वो सागर की गहरायी लिए हुए आवाज भी शांत हो गयी जिसने ‘तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो , ‘‘झुकी झुकी सी नजर , और भी न जाने कितने नगमों से करोड़ों लोगों के दिल में गहरे तक उतर कर अपनी एक खास जगह बनायी थी।
70 और 80 के दशक में दरबारी परंपरा से निकाल कर गजल गायिकी को आम आदमी के करीब लाने वाले 70 वर्षीय जगजीत सिंह को 23 सितंबर को लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां उनका आपरेशन किया गया लेकिन वे अपनी बीमारी के चंगुल से निकल नहीं पाए और उन्हें जीवन रक्षक उपकरणों पर रखा गया ।
जगजीत सिंह ने गजल गायिकी में उस नए दौर की शुरूआत की जहां गजल अरबी और फारसी के दायरे से निकल कर उर्दू जबान के साथ एक अलग ही अंदाज में सामने आयी जिसे संगीत प्रेमियों ने हाथों हाथ लिया और जगजीत सिंह को सरताज बना दिया। गजल गायिकी में वो हर लफ्ज अमर हो गया जिसे जगजीत सिंह ने अपनी रेशमी आवाज की डोर से बांधा लेकिन इसके बावजूद उनकी कुछ ऐसी गजलें रहीं जो गाहे बगाहे जेहन में यूं ही बेरोकटोक चली आया करती हैं । बेमोल बचपन की यादों में गुंथी ‘‘कागज की कश्ती , बारिश का पानी,’’, अमर प्रेम की प्रतीक ‘पत्ता पत्ता बूटा बूटा’’ , ‘‘होठों से छू लो तुम , मेरा गीत अमर कर दो ’’ और ‘‘तुमको देखा तो ये ख्याल आया’’ कुछ ऐसी ही गजलें हैं ।
जगजीत सिंह के निधन की खबर से चारों ओर माहौल काफी गमगीन हो गया है और फिल्मी हस्तियों तथा उनके समकालीनों से लेकर राजनीतिक हस्तियों तक , सभी ने उनके निधन पर गहरा अफसोस जाहिर किया है ।
सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर ने जगजीत सिंह के निधन को संगीत जगत के लिए भारी क्षति बताया और कहा,‘‘मैं उन्हें बहुत अच्छे से जानती थी। मैं उम्मीद कर रही थी कि वह कोमा से बाहर आ जाएंगे । लेकिन भगवान को कुछ और ही मंजूर था।’’ उनकी बहन आशा भोंसले ने कहा कि उनके जैसा इंसान अब कभी नहीं होगा।
अमिताभ बच्चन ने सिंह की पुरकशिश आवाज को याद करते हुए उनके निधन को संगीत और गजल गायिकी की दुनिया के लिए बहुत बड़ा नुकसान बताया।
शाहरूख खान ने कहा,‘‘जगजीत सिंह जी के जाने की खबर बेहद दुखदायी है । भगवान उनकी आत्मा को शांति दे ।’’ लीलावती अस्पताल के प्रवक्ता डा. सुधीर नंदगांवकर ने यहां बताया,‘‘सुबह आठ बजकर दस मिनट पर भयंकर हेमरेज होने के बाद जगजीत सिंह ने अंतिम सांस ली।’’ सिंह अपने पीछे अपनी पत्नी और गायिका चित्रा सिंह को छोड़ गए हैं । उनके इकलौते बेटे विवेक की 1990 में एक सड़क हादसे में मौत हो गयी थी।
प्रसिद्ध गजल गायक और जगजीत सिंह के समकालीन पंकज उधास ने अपने शोक संदेश में कहा,‘‘हमें ऐसा इंसान कभी नहीं मिलेगा जो अपने फन के लिए इस कदर कुर्बान था। संगीत उनके लिए पेशा नहीं था बल्कि एक जुनून था।’’ जगजीत सिंह ने उस दौर में गजल गायिकी की दुनिया में कदम रखा था जब फलक पहले से ही नूरजहां , मल्लिका पुखराज, बेगम अख्तर , तलत महमूद और मेहंदी हसन जैसे सितारों से रोशन था।
इस गजल गायक ने के एल सहगल, तलत महमूद , अब्दुल करीम खान, बड़े गुलाम अली खान तथा आमीर खान से प्रेरणा पायी। पद्म भूषण से सम्मानित सिंह का जन्म राजस्थान के श्रीगंगानगर में आठ फरवरी 1941 को हुआ था।
स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने संगीत की दुनिया में भविष्य बनाने के लिए मुंबई की राह पकड़ी । मुंबई पहुंचने के बाद पहला दशक उनके नाम रहा और उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर गजल गायक और संगीतकार के रूप में नाम कमाया। उन्होंने हिंदी, पंजाबी, बंगाली, गुजराती और नेपाली में गीतों को अपनी आवाज दी।
उनके संगीत करियर में करीब 80 एलबम , फिल्म संगीत, कई संगीत समारोह और भजन शामिल हैं । उनकी लोकप्रिय रचना ‘मिर्जा गालिब’ मानी जाती है जो 18वीं सदी के उर्दू शायर मिर्जा गालिब की गजलांे का संग्रह है । इसके अलावा उनकी एलबम ‘मरासिम’, ‘फेस टू फेस’, ‘आईना’, ‘क्राई फोर क्राई ’, ‘ समवन , समव्हेयर’ और ‘मुंतजीर’ भी काफी लोकप्रिय रही थीं ।
राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह , फिल्म जगत की जानी मानी हस्तियों समेत विभिन्न राजनेताओं ने इसे अपूर्णीय क्षति करार देते हुए गहरी संवेदना जाहिर की है ।
प्रतिभा पाटिल ने उनकी पत्नी चित्रा के नाम अपने संवेदना संदेश में कहा,‘‘गजल सम्राट के रूप में मशहूर जगजीत सिंह का दिल भी बहुत बड़ा था और इसी के चलते वह धर्मार्थ कार्यो में भी लगे थे ।’’ जगजीत सिंह के मुरीदों में शामिल प्रधानमंत्री ने अपने शोक संदेश में कहा है कि उन्हें कुदरत ने सुनहरी आवाज दी थी जिसके जरिए उन्होंने करोड़ों संगीत प्रेमियों पर यह दौलत लुटायी ।
वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी और पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने गजल सम्राट के निधन को राष्ट्र और इसकी संस्कृति के प्रति बड़ी क्षति करार दिया।
महान गजल गायक जगजीत सिंह का ब्रेन हेमरेज के चलते आज निधन हो गया और उसी के साथ वो सागर की गहरायी लिए हुए आवाज भी शांत हो गयी जिसने ‘तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो , ‘‘झुकी झुकी सी नजर , और भी न जाने कितने नगमों से करोड़ों लोगों के दिल में गहरे तक उतर कर अपनी एक खास जगह बनायी थी।
70 और 80 के दशक में दरबारी परंपरा से निकाल कर गजल गायिकी को आम आदमी के करीब लाने वाले 70 वर्षीय जगजीत सिंह को 23 सितंबर को लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां उनका आपरेशन किया गया लेकिन वे अपनी बीमारी के चंगुल से निकल नहीं पाए और उन्हें जीवन रक्षक उपकरणों पर रखा गया ।
जगजीत सिंह ने गजल गायिकी में उस नए दौर की शुरूआत की जहां गजल अरबी और फारसी के दायरे से निकल कर उर्दू जबान के साथ एक अलग ही अंदाज में सामने आयी जिसे संगीत प्रेमियों ने हाथों हाथ लिया और जगजीत सिंह को सरताज बना दिया। गजल गायिकी में वो हर लफ्ज अमर हो गया जिसे जगजीत सिंह ने अपनी रेशमी आवाज की डोर से बांधा लेकिन इसके बावजूद उनकी कुछ ऐसी गजलें रहीं जो गाहे बगाहे जेहन में यूं ही बेरोकटोक चली आया करती हैं । बेमोल बचपन की यादों में गुंथी ‘‘कागज की कश्ती , बारिश का पानी,’’, अमर प्रेम की प्रतीक ‘पत्ता पत्ता बूटा बूटा’’ , ‘‘होठों से छू लो तुम , मेरा गीत अमर कर दो ’’ और ‘‘तुमको देखा तो ये ख्याल आया’’ कुछ ऐसी ही गजलें हैं ।
जगजीत सिंह के निधन की खबर से चारों ओर माहौल काफी गमगीन हो गया है और फिल्मी हस्तियों तथा उनके समकालीनों से लेकर राजनीतिक हस्तियों तक , सभी ने उनके निधन पर गहरा अफसोस जाहिर किया है ।
सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर ने जगजीत सिंह के निधन को संगीत जगत के लिए भारी क्षति बताया और कहा,‘‘मैं उन्हें बहुत अच्छे से जानती थी। मैं उम्मीद कर रही थी कि वह कोमा से बाहर आ जाएंगे । लेकिन भगवान को कुछ और ही मंजूर था।’’ उनकी बहन आशा भोंसले ने कहा कि उनके जैसा इंसान अब कभी नहीं होगा।
अमिताभ बच्चन ने सिंह की पुरकशिश आवाज को याद करते हुए उनके निधन को संगीत और गजल गायिकी की दुनिया के लिए बहुत बड़ा नुकसान बताया।
शाहरूख खान ने कहा,‘‘जगजीत सिंह जी के जाने की खबर बेहद दुखदायी है । भगवान उनकी आत्मा को शांति दे ।’’ लीलावती अस्पताल के प्रवक्ता डा. सुधीर नंदगांवकर ने यहां बताया,‘‘सुबह आठ बजकर दस मिनट पर भयंकर हेमरेज होने के बाद जगजीत सिंह ने अंतिम सांस ली।’’ सिंह अपने पीछे अपनी पत्नी और गायिका चित्रा सिंह को छोड़ गए हैं । उनके इकलौते बेटे विवेक की 1990 में एक सड़क हादसे में मौत हो गयी थी।
प्रसिद्ध गजल गायक और जगजीत सिंह के समकालीन पंकज उधास ने अपने शोक संदेश में कहा,‘‘हमें ऐसा इंसान कभी नहीं मिलेगा जो अपने फन के लिए इस कदर कुर्बान था। संगीत उनके लिए पेशा नहीं था बल्कि एक जुनून था।’’ जगजीत सिंह ने उस दौर में गजल गायिकी की दुनिया में कदम रखा था जब फलक पहले से ही नूरजहां , मल्लिका पुखराज, बेगम अख्तर , तलत महमूद और मेहंदी हसन जैसे सितारों से रोशन था।
इस गजल गायक ने के एल सहगल, तलत महमूद , अब्दुल करीम खान, बड़े गुलाम अली खान तथा आमीर खान से प्रेरणा पायी। पद्म भूषण से सम्मानित सिंह का जन्म राजस्थान के श्रीगंगानगर में आठ फरवरी 1941 को हुआ था।
स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने संगीत की दुनिया में भविष्य बनाने के लिए मुंबई की राह पकड़ी । मुंबई पहुंचने के बाद पहला दशक उनके नाम रहा और उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर गजल गायक और संगीतकार के रूप में नाम कमाया। उन्होंने हिंदी, पंजाबी, बंगाली, गुजराती और नेपाली में गीतों को अपनी आवाज दी।
उनके संगीत करियर में करीब 80 एलबम , फिल्म संगीत, कई संगीत समारोह और भजन शामिल हैं । उनकी लोकप्रिय रचना ‘मिर्जा गालिब’ मानी जाती है जो 18वीं सदी के उर्दू शायर मिर्जा गालिब की गजलांे का संग्रह है । इसके अलावा उनकी एलबम ‘मरासिम’, ‘फेस टू फेस’, ‘आईना’, ‘क्राई फोर क्राई ’, ‘ समवन , समव्हेयर’ और ‘मुंतजीर’ भी काफी लोकप्रिय रही थीं ।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा लिखे गए गीतों को दो एलबम ‘नयी दिशा’ और ‘संवेदना’ के रूप में लोगों के सामने का श्रेय भी जगजीत सिंह को जाता है । उनका अंतिम संगीत समारोह 23 सितंबर को गुलाम अली के साथ मुंबई में माटुंगा के संमुखानंद हाल में होना तय था लेकिन उसी दिन उनके बीमार पड़ने के कारण इसे रद्द करना पड़ा। दोनों महान गजल गायकों ने कुछ ही दिनों पहले दिल्ली में शानदार प्रस्तुति दी थी।
सूचना और प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी और स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद ने भी जगजीत के निधन पर शोक जताया है ।
इस महान गजल गायक के अचानक यूं महफिल से उठकर चले जाने पर केवल इतना कहा जा सकता है ‘‘फरिश्तों अब तो सोने दो , कभी फुरसत में कर लेना हिसाब , आहिस्ता , आहिस्ता ।’’
सूचना और प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी और स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद ने भी जगजीत के निधन पर शोक जताया है ।
इस महान गजल गायक के अचानक यूं महफिल से उठकर चले जाने पर केवल इतना कहा जा सकता है ‘‘फरिश्तों अब तो सोने दो , कभी फुरसत में कर लेना हिसाब , आहिस्ता , आहिस्ता ।’’
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