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नई दिल्ली, चार नवम्बर (सीएमसी) : पेट्रोल की कीमतों पर देश और यूपीए के घटक दलों में हाहाकार मचा है लेकिन सरकार पर इसका कोई असर होता नहीं दिख रहा. पहले वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने हाथ खड़े किए और अब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी साफ कर दिया है कि पेट्रोल की कीमतों पर सरकार का वश नहीं है.
फ्रांस के शहर कान में पीएम ने कहा कि पेट्रोल की कीमतें बाजार तय करता है. उन्होंने ये भी कह दिया कि तेल की कीमतों से सरकारी नियंत्रण हटाने के लिए हमें और आगे बढ़ना चाहिए. माना जा रहा है कि पीएम का इशारा डीजल की कीमतों से सरकारी कंट्रोल हटाने पर है.
साफ है मनमोहन पेट्रोल कीमतों को लेकर देश में हो रहे प्रदर्शन और घटक दलों के तीखे तेवर से जरा भी परेशान नहीं हैं. उल्टे पीएम ने तो यहां तक कह दिया है कि खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोत्तरी मांग से जुड़ी हुई है और मांग में बढ़ोत्तरी एक तरफ देश की बढ़ती संपन्नता को दिखाता है.
लगता है पेट्रोल की कीमतों पर सरकार के सभी मंत्री एक ही सुर में बोल रहे हैं. केंद्रीय मंत्री जयपाल रेड्डी ने भी कहा है कि ये सरकार के कंट्रोल के बाहर की चीज है. उन्होंने कहा कि वो जनता का गुस्सा समझते हैं लेकिन जनता को अर्थव्यवस्था की हकीकत को समझना होगा. उन्होंने कहा कि दुनिया की अर्थव्यवस्था की हालत खराब है. पिछले सात महीनों में तेल की कीमतें बढ़ी हैं और रुपये की कीमत घटी है. अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें घट जाएं और रुपये का मूल्य बढ़ जाए तो सरकार निश्चित तौर पर पेट्रोल की कीमतों में कमी लाएगी.
जयपाल रेड्डी ने डीजल और गैस की कीमत बढ़ाने के भी संकेत दिए. उन्होंने कहा कि वो वित्त मंत्री को खत लिख चुके हैं कि डीजल वाहनों पर टैक्स बढ़ाया जाए. उन्होंने कहा कि मुझे बुरा लगता है जब देखता हूं महंगी डीजल गाड़ियों के मालिक छोटी कार के मुकाबले बहुत कम खर्च करते हैं. मैं चाहता हूं कि ईजीओएम एलपीजी और डीजल की कीमत बढ़ाने पर विचार करे.
महंगाई के मारे लोग राहत राहत चिल्ला रहे हैं और सरकार के मंत्री मुंह फेर कर जा रहे हैं. मनमोहन सरकार के सबसे बड़े मंत्री प्रणब मुखर्जी ने पेट्रोल के बढ़े दामों के बारे में ठगा सा जवाब दिया. उन्होंने कहा कि पेट्रोल की कीमत क्यों बढ़ी इस बारे में तो पेट्रोल कंपनियों ने बता दिया है.
पेट्रोल की कीमतों पर सरकार का वश नहीं - प्रधानमंत्री
क्लीन मीडिया संवाददता
नई दिल्ली, चार नवम्बर (सीएमसी) : पेट्रोल की कीमतों पर देश और यूपीए के घटक दलों में हाहाकार मचा है लेकिन सरकार पर इसका कोई असर होता नहीं दिख रहा. पहले वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने हाथ खड़े किए और अब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी साफ कर दिया है कि पेट्रोल की कीमतों पर सरकार का वश नहीं है.
फ्रांस के शहर कान में पीएम ने कहा कि पेट्रोल की कीमतें बाजार तय करता है. उन्होंने ये भी कह दिया कि तेल की कीमतों से सरकारी नियंत्रण हटाने के लिए हमें और आगे बढ़ना चाहिए. माना जा रहा है कि पीएम का इशारा डीजल की कीमतों से सरकारी कंट्रोल हटाने पर है.
साफ है मनमोहन पेट्रोल कीमतों को लेकर देश में हो रहे प्रदर्शन और घटक दलों के तीखे तेवर से जरा भी परेशान नहीं हैं. उल्टे पीएम ने तो यहां तक कह दिया है कि खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोत्तरी मांग से जुड़ी हुई है और मांग में बढ़ोत्तरी एक तरफ देश की बढ़ती संपन्नता को दिखाता है.
लगता है पेट्रोल की कीमतों पर सरकार के सभी मंत्री एक ही सुर में बोल रहे हैं. केंद्रीय मंत्री जयपाल रेड्डी ने भी कहा है कि ये सरकार के कंट्रोल के बाहर की चीज है. उन्होंने कहा कि वो जनता का गुस्सा समझते हैं लेकिन जनता को अर्थव्यवस्था की हकीकत को समझना होगा. उन्होंने कहा कि दुनिया की अर्थव्यवस्था की हालत खराब है. पिछले सात महीनों में तेल की कीमतें बढ़ी हैं और रुपये की कीमत घटी है. अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें घट जाएं और रुपये का मूल्य बढ़ जाए तो सरकार निश्चित तौर पर पेट्रोल की कीमतों में कमी लाएगी.
जयपाल रेड्डी ने डीजल और गैस की कीमत बढ़ाने के भी संकेत दिए. उन्होंने कहा कि वो वित्त मंत्री को खत लिख चुके हैं कि डीजल वाहनों पर टैक्स बढ़ाया जाए. उन्होंने कहा कि मुझे बुरा लगता है जब देखता हूं महंगी डीजल गाड़ियों के मालिक छोटी कार के मुकाबले बहुत कम खर्च करते हैं. मैं चाहता हूं कि ईजीओएम एलपीजी और डीजल की कीमत बढ़ाने पर विचार करे.
महंगाई के मारे लोग राहत राहत चिल्ला रहे हैं और सरकार के मंत्री मुंह फेर कर जा रहे हैं. मनमोहन सरकार के सबसे बड़े मंत्री प्रणब मुखर्जी ने पेट्रोल के बढ़े दामों के बारे में ठगा सा जवाब दिया. उन्होंने कहा कि पेट्रोल की कीमत क्यों बढ़ी इस बारे में तो पेट्रोल कंपनियों ने बता दिया है.
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