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सूर्य उपासना का महापर्व छठ संपन्न
क्लीन मीडिया संवाददाता
वाराणसी, दो नवम्बर (सीएमसी) लोक आस्था के महापर्व छठ के चौथे दिन बुधवार प्रात: देश के विभिन्न भागों में विभिन्न नदी, तालाबों, नहरों पर बने घाटों पर जाकर तथा आवासीय प्रांगण एवं घर की छतों पर कृत्रिम रूप से बनाए गए कुंड में लाखों की संख्या में व्रतियों द्वारा भगवान भास्कर को दूसरा अर्घ्य देने और छठी मैया की पूजा के साथ यह पर्व संपन्न हो गया.
सूर्य उपासना का महापर्व आज वाराणसी में भी संपन्न हो गया. छठ पर्व के चौथे एवं अंतिम दिन पौ फटने से पूर्व ही व्रती और उनके परिजन अपने.अपने घरों से पूजा सामग्रियों के साथ के गंगा किनारे स्थित विभिन्न घाटों पर पहुंचे. उन्होंने आधे कमर तक पानी में खड़े होकर पूजा सामग्रियों से भरे सूप हाथों में लिए और भगवान भास्कर को पूरी श्रद्धा के साथ दूसरा अर्घ्य दिया.

छठ व्रतियों द्वारा भगवान भास्कर को दूसरा अर्घ्य देने के साथ ही उनका छत्तीस घंटे का उपवास भी समाप्त हो गया. उन्होंने प्रसाद ग्रहण किया और इसी के साथ ही व्रत और उपवास का चार दिनों तक चलने वाला यह पर्व संपन्न हो गया.
सूर्य उपासना का महापर्व छठ संपन्न
क्लीन मीडिया संवाददाता
वाराणसी, दो नवम्बर (सीएमसी) लोक आस्था के महापर्व छठ के चौथे दिन बुधवार प्रात: देश के विभिन्न भागों में विभिन्न नदी, तालाबों, नहरों पर बने घाटों पर जाकर तथा आवासीय प्रांगण एवं घर की छतों पर कृत्रिम रूप से बनाए गए कुंड में लाखों की संख्या में व्रतियों द्वारा भगवान भास्कर को दूसरा अर्घ्य देने और छठी मैया की पूजा के साथ यह पर्व संपन्न हो गया.
सूर्य उपासना का महापर्व आज वाराणसी में भी संपन्न हो गया. छठ पर्व के चौथे एवं अंतिम दिन पौ फटने से पूर्व ही व्रती और उनके परिजन अपने.अपने घरों से पूजा सामग्रियों के साथ के गंगा किनारे स्थित विभिन्न घाटों पर पहुंचे. उन्होंने आधे कमर तक पानी में खड़े होकर पूजा सामग्रियों से भरे सूप हाथों में लिए और भगवान भास्कर को पूरी श्रद्धा के साथ दूसरा अर्घ्य दिया.
छठ व्रतियों द्वारा भगवान भास्कर को दूसरा अर्घ्य देने के साथ ही उनका छत्तीस घंटे का उपवास भी समाप्त हो गया. उन्होंने प्रसाद ग्रहण किया और इसी के साथ ही व्रत और उपवास का चार दिनों तक चलने वाला यह पर्व संपन्न हो गया.
सूर्य उपासना के महापर्व छठ के अवसर पर व्रतियों की सुविधा के लिये वाराणसी के विभिन्न घाटों एवं वहां तक जानेवाली सडकों की स्थानीय लोगों, स्वयं सेवी संगठनों और विभिन्न पूजा समितियों द्वारा सफाई की गई थी. उनके स्वागत में जगह-जगह तोरणद्वार बनाये गये थे और प्रकाश की व्यवस्था की गयी थी.
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