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नोट फॉर वोट मामले में सुधीन्द्र कुलकर्णी को जमानत
क्लीन मीडिया संवाददाता
नई दिल्ली, 16 नवम्बर (सीएमसी) : दिल्ली उच्च न्यायालय ने वोट के लिए नोट मामले में बुधवार को सुधींद्र कुलकर्णी और पांच अन्य को जमानत दे दी.
साल 2008 के नोट के बदले वोट घोटाले में आरोपी तथा भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी के पूर्व सहयोगी सुधींद्र कुलकर्णी और पूर्व भाजपा सांसदों फग्गन सिंह कुलस्ते और महावीर सिंह भगोरा को भी कोर्ट ने पहले जमानत देने से इनकार किया था.
कुलस्ते और भगोरा को छह सितंबर को राज्यसभा सदस्य अमर सिंह के साथ गिरफ्तार किया गया था.
दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने अपने आरोपपत्र में कुलकर्णी को नोट के बदले वोट घोटाले का सूत्रधार बताते हुए कहा था कि वह मामले के साजिशकर्ताओं के साथ संपर्क में रहे और भाजपा सांसदों को ‘अवैध रिश्वत’ दिये जाते वक्त मौजूद थे.
पुलिस ने कहा था कि कुलकर्णी को इस बात का पता था कि भाजपा के तीन सांसदों- कुलस्ते, भगोरा और अशोक अर्गल को धन का भुगतान किया गया है, लेकिन उन्होंने इस बारे में कानून प्रवर्तन एजेंसियों को सूचित नहीं किया.
कुलकर्णी पर आईपीसी की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश) तथा भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम की धाराओं के तहत आरोपपत्र दाखिल किया गया था.
नोट फॉर वोट मामले में सुधीन्द्र कुलकर्णी को जमानत
क्लीन मीडिया संवाददाता
नई दिल्ली, 16 नवम्बर (सीएमसी) : दिल्ली उच्च न्यायालय ने वोट के लिए नोट मामले में बुधवार को सुधींद्र कुलकर्णी और पांच अन्य को जमानत दे दी.
साल 2008 के नोट के बदले वोट घोटाले में आरोपी तथा भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी के पूर्व सहयोगी सुधींद्र कुलकर्णी और पूर्व भाजपा सांसदों फग्गन सिंह कुलस्ते और महावीर सिंह भगोरा को भी कोर्ट ने पहले जमानत देने से इनकार किया था.
कुलस्ते और भगोरा को छह सितंबर को राज्यसभा सदस्य अमर सिंह के साथ गिरफ्तार किया गया था.
दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने अपने आरोपपत्र में कुलकर्णी को नोट के बदले वोट घोटाले का सूत्रधार बताते हुए कहा था कि वह मामले के साजिशकर्ताओं के साथ संपर्क में रहे और भाजपा सांसदों को ‘अवैध रिश्वत’ दिये जाते वक्त मौजूद थे.
पुलिस ने कहा था कि कुलकर्णी को इस बात का पता था कि भाजपा के तीन सांसदों- कुलस्ते, भगोरा और अशोक अर्गल को धन का भुगतान किया गया है, लेकिन उन्होंने इस बारे में कानून प्रवर्तन एजेंसियों को सूचित नहीं किया.
कुलकर्णी पर आईपीसी की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश) तथा भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम की धाराओं के तहत आरोपपत्र दाखिल किया गया था.
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