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Tuesday, 10 January 2012

माकपा संग विकास में रोड़े अटका रही है कांग्रेस

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माकपा संग विकास में रोड़े अटका रही है कांग्रेस 
क्लीन मीडिया संवाददाता 


कोलकाता, 10 जनवरी (सीएमसी) : तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कांग्रेस पर हमला जारी है। इस दफे उन्होंने कांग्रेस का नाम लिए बगैर आरोप लगाया है वह मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के साथ मिलकर प्रदेश के विकास की राह में रोड़े अटका रही है। ममता ने इस मौके पर यह भी कहा कि वह इंदिरा भवन का नाम बंगाल के क्रांतिकारी कवि काजी नजरूल इस्लाम के नाम पर करने के अपने फैसले पर अडिग हैं।
 बनर्जी ने मंगलवार को सरकार द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि उन लोगों को मैं बताना चाहूंगी जो माकपा के साथ सड़कों और गलियों में उतरकर नजरूल अकादमी और नजरूल इस्लाम सारणी पर सवाल उठा रहे हैं। ये लोग इस तरीके से विकास की राह में रोड़े नहीं अटका सकते।
 ममता ने काजी नजरूल इस्लाम का उचित सम्मान न करने के लिए माकपा की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि काजी नजरूल इस्लाम को बंगाल में उचित सम्मान नहीं मिला। माकपा ने नजरूल अकादमी के नाम पर चुरुलिया में दो पार्टी कार्यालय खोल लिए हैं। यह कोई अकादमी है। हम ऐसी अकादमी नहीं चाहते। काजी नजरूल इस्लाम का जन्म राज्य के बर्दवान जिले के चुरुलिया में 1899 में हुआ था।
 उन्होंने कहा कि मैं चाहती हूं कि भारत और बांग्लादेश मिलकर नजरूल पर शोध करें। मैं चाहती हूं कि विदेशों के छात्र भी उन पर शोध करें। ममता ने कहा कि हम चाहते हैं कि हर समुदाय अपने नेता के प्रति सम्मान का भाव रखे। लेकिन हमें यह ध्यान भी रखना होगा कि जो लोग देश के नेता हैं वह समुदाय विशेष के नेता नहीं हो सकते। काज नजरूल इस्लाम किसी समुदाय विशेष के नहीं थे।
 गौर हो कि तृणमूल पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के साथ गठबंधन सरकार चला रही है। सरकार चलाने के लिए तृणमूल हालांकि कांग्रेस पर आश्रित नहीं है। हाल के दिनों में वह लगातार कांग्रेस पर निशाना साध रही है और दोनों के रिश्तों में बहुत तल्खी आई है। वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव के बाद सरकार में शामिल तृणमूल के संप्रग के साथ रिश्तों में कई मुद्दों को लेकर अक्सर तल्खी सामने आई है। इस समय दोनों पार्टियों के बीच कोलकाता स्थित इंदिरा भवन का नाम बदले जाने को लेकर विवाद पैदा हो गया है।
 ममता इस भवन का नाम बांग्ला भाषा के क्रांतिकारी कवि काजी नजरुल इस्लाम के नाम पर रखना चाहती हैं। नाम बदलने को लेकर बनर्जी का तर्क यह है कि यदि हम नजरुल इस्लाम के नाम पर किसी चीज का नामकरण करते हैं तो वे इतने नाराज क्यों हैं? क्यों हम मौलाना आजादजी, अंबेडकरजी और अन्य के नाम पर किसी चीज का नामकरण नहीं कर सकते?

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