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Tuesday, 13 December 2011

चीन की सैन्य अड्डा बनाने की कोशिश नहीं

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चीन की सैन्य अड्डा बनाने की कोशिश नहीं 
क्लीन मीडिया संवाददाता 


बीजिंग, 13 दिसम्बर (सीएमसी) : चीनी सैन्य विश्लेषकों का दावा है कि सामरिक रूप से महत्वपूर्ण सेशल्स में एक आपूर्ति केंद्र की स्थापना की चीन की कोशिशें सैन्य अड्डे की स्थापना नहीं है। चीनी रक्षा मंत्रालय ने कल कहा था कि एस्कोर्ट अभियानों के दौरान उसका नौसैनिक बीड़ा सेशल्स में उपयुक्त गोदियों में आपूर्ति चाह सकती हैं या सुस्ताना चाहेंगी। इस घटनाक्रम को भारत में व्यापक तौर पर कवरेज मिला।
 चाइना डेली ने भारतीय और अमेरिकी मीडिया में इस बाबत रिपोर्टों की चर्चा करते हुए कहा कि नौसेना जलदस्युओं से निबटने के लिए एस्कोट अभियान संचालित करते हुए सेशल्स में आपूर्तियां लेने पर विचार कर सकती है। सैन्य विशेषज्ञों ने जोर दिया है कि यह कदम सैन्य अड्डा की स्थापना के बराबर नहीं है।
 बयान के अनुसार चीन ने जलदस्युओं के खिलाफ 2008 में अदन की खाड़ी में अपना पहला कारवां भेजा था। तब से चीनी नौसैनिक बीड़ा के पास दजिबोती, ओमान और यमन में पुन: आपूर्ति सुविधाएं हैं।
 सेशेल्स के विदेश मंत्री जियां-पॉल आदम ने हाल ही में कहा था कि चीन को उनके देश में एक सैन्य उपस्थिति स्थापित करने के लिए आमंत्रित किया गया है। आदम ने कहा कि सेशल्स नियमित आधार पर जलदस्युओं के हमलों का सामना करता है और हमने जलदस्युओं के हमले से लड़ने के लिए एक सैन्य उपस्थिति स्थापित करने के लिए चीन सरकार को आमंत्रित किया है।
 उन्होंने चीन के रक्षामंत्री लियांग गुआंगली की हाल की सेशेल्स यात्रा के दौरान कहा था कि अभी चीन इस संभावना पर विचार कर रहा है क्योंकि इस क्षेत्र में उसके आर्थिक हित हैं और चीन जलदस्युओं के खिलाफ संघर्ष में शामिल है।
 चाइना डेली ने कहा कि भारतीय मीडिया के अलावा अमेरिकी मीडिया के एक हिस्से ने चिंता जताई है कि सेशेल्स में इस तरह के किसी सैन्य अड्डे से अफ्रीका में चीनी प्रभाव अमेरिकी प्रभाव को पार कर जाएगा। चीनी दैनिक ने नेवल मिल्रिटी स्टडीज रिसर्च इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर ली जाइ के हवाले से कहा कि चूंकि चीन सेशेल्स में आपूर्ति की सुरक्षा के लिए कोई सेना नहीं भेजेगा किसी भी तरह से इसे विदेशी सैन्य अड्डा नहीं कहा जा सकता। चीन ने बार बार इसकी पुष्टि की है कि विदेशों में सैन्य तैनाती नहीं करने की उसकी नीति नहीं बदली जाएगी।

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