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न्यायालय, निचली अदालत के उस आदेश के खिलाफ याहू की याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें कथितरूप से आपत्तिजनक सामग्री रखने के लिए वेबसाइट के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया गया था। न्यायमूर्ति सुरेश कैट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए पहली मार्च की तारीख तय की।
फेसबुक व गूगल सहित याहू, उन वेबसाइटस में शामिल हैं, जिन्हें सोमवार को प्रशासनिक सिविल जज प्रवीण सिंह ने साइट्स से आपत्तिजनक सामग्री हटाने को लेकर 15 दिनों के अंदर लिखित बयान दाखिल करने का निर्देश दिया था। न्यायालय ने यह निर्देश तब दिया, जब गूगल ने सूचित किया कि उसने कुछ पृष्ठ हटा दिए हैं।
न्यायालय ने कहा, ‘बचाव पक्ष 15 दिनों के भीतर हर हाल में एक लिखित बयान दाखिल करे।’ न्यायालय, पीस फाउंडेशन नामक एक गैर सरकारी संगठन चलाने वाले, इस्लामी शोधकर्ता मुफ्ती एजाज अरशद कासमी की याचिका पर सुनवाई कर रहा था। याचिका में वेबसाइट्स से आपत्तिजनक सामग्री हटाने की मांग की गई थी।
याहू मामले होगी सुनवाई- न्यायलय
क्लीन मीडिया संवाददाता
नयी दिल्ली, 10 फरवरी, (सीएमसी) दिल्ली उच्च न्यायालय ने वेबसाइट पर कथित आपत्तिजनक सामग्री रखने के मामले में याहू इंडिया के खिलाफ निचली अदालत में चल रही सुनवाई पर रोक लगाने से इंकार करते हुए मामले की सुनवाई पहली मार्च तक स्थगित कर दी। न्यायालय, निचली अदालत के उस आदेश के खिलाफ याहू की याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें कथितरूप से आपत्तिजनक सामग्री रखने के लिए वेबसाइट के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया गया था। न्यायमूर्ति सुरेश कैट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए पहली मार्च की तारीख तय की।
फेसबुक व गूगल सहित याहू, उन वेबसाइटस में शामिल हैं, जिन्हें सोमवार को प्रशासनिक सिविल जज प्रवीण सिंह ने साइट्स से आपत्तिजनक सामग्री हटाने को लेकर 15 दिनों के अंदर लिखित बयान दाखिल करने का निर्देश दिया था। न्यायालय ने यह निर्देश तब दिया, जब गूगल ने सूचित किया कि उसने कुछ पृष्ठ हटा दिए हैं।
न्यायालय ने कहा, ‘बचाव पक्ष 15 दिनों के भीतर हर हाल में एक लिखित बयान दाखिल करे।’ न्यायालय, पीस फाउंडेशन नामक एक गैर सरकारी संगठन चलाने वाले, इस्लामी शोधकर्ता मुफ्ती एजाज अरशद कासमी की याचिका पर सुनवाई कर रहा था। याचिका में वेबसाइट्स से आपत्तिजनक सामग्री हटाने की मांग की गई थी।
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