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भारतीयों के पास 950 अरब डॉलर का सोना-रिपोर्ट
क्लीन मीडिया संवाददाता

भारतीयों के पास 950 अरब डॉलर का सोना-रिपोर्ट
क्लीन मीडिया संवाददाता
नई दिल्ली, 04 दिसम्बर (सीएमसी) : भारतीयों का सोने से लगाव जगजाहिर है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय परिवारों के पास 950 अरब डॉलर (49,400 अरब रुपए) मूल्य का सोना है। वैश्विक अनुसंधान फर्म मैकक्वैरी की रिपोर्ट में कहा गया है कि सोना रखना देश की संस्कृति और परंपरा का हिस्सा है। भारत सोने का सबसे बड़ा उपभोक्ता है। चीन का नंबर उसके बाद आता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय परिवारों के पास 18,000 टन सोना है, जो सोने के वैश्विक भंडार का 11 प्रतिशत है और मौजूदा मूल्य के हिसाब से यह 950 अरब डॉलर का बैठता है।यह सोना डॉलर मूल्य में भारत के सकल घरेलू उत्पाद का 50 प्रतिशत है। मैकक्वैरी ने कहा है कि वित्त वर्ष 2009-10 में भारतीयों परिवारों की कुल बचत 329 अरब डॉलर थी। इसमें से सात से आठ फीसद निवेश सोने में किया गया था। सोने को श्रृंगार से अधिक सम्पत्ति रखने का साधन के रूप में देखा जाता है। इस वजह से इस समय सोने के दाम बढ़ने से भारतीय परिवारों की इस अनुमानित स्वर्ण संपत्ति का मूल्य भी बढ़ा है।
रिपोर्ट में यह शब्द इसलिए इस्तेमाल किया गया है क्योंकि आम भारतीय परिवार संकट के समय भी सोने के आभूषण या सोना नहीं बेचते, क्योंकि ऐसा किए जाने को वे सही नहीं मानते। दिलचस्प बात यह है कि जनवरी, 2010 से सितंबर, 2011 के बीच देश में सोने की कीमतों में 64 फीसद का इजाफा हुआ है। इसके बावजूद भारत में सोने की मांग मजबूत बनी हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2011 की पहली तीन तिमाहियों में सालाना आधार पर सोने की खपत में पांच फीसद का इजाफा हुआ है। 2010 में सालाना आधार पर सोने की मांग 72 प्रतिशत बढ़ी थी।
हालांकि, सितंबर, 2011 को समाप्त तिमाही में मात्रा के हिसाब से सोने की मांग पिछले साल की तुलना में 23 फीसद कम रही है। इसकी मुख्य वजह रुपये में गिरावट है। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि सोने की खपत बढ़ना रुपये में गिरावट की मुख्य वजह है। मैकक्वैरी ने कहा है कि वित्त वर्ष 2007-08 से 2010-11 के दौरान अकेले सोने के आयात ने ही देश के चालू खाते के घाटे (सीएडी) में 1.3 प्रतिशत वृद्धि में 0.4 से 1.3 प्रतिशत का योगदान किया है।
कच्चे तेल और पूंजीगत सामान के बाद देश के आयात के मामले में सोना तीसरे नंबर पर है। रिपोर्ट में बताया गया है कि 2010 में देश में 92 फीसद सोने की आपूर्ति शुद्ध आयात से पूरी की गई और शेष रीसाइकिल्ड गोल्ड और अन्य स्रोतों से की गई। भारत में रुपये में कमजोरी की एक मुख्य वजह बड़ा चालू खाते का घाटा है। वहीं अन्य एशियाई देशों में चालू खाते के अधिशेष की स्थिति है। मैकक्वैरी ने कहा, 2011-12 में देश का चालू खाते का खाता उच्च स्तर जीडीपी के 2.8 प्रतिशत पर रहेगा
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