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टीम अन्ना को अदालत ने दिया झटका
क्लीन मीडिया संवाददाता
टीम अन्ना को अदालत ने दिया झटका
क्लीन मीडिया संवाददाता
मुंबई, 23 दिसम्बर (सीएमसी) :बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को जागृति मंच की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें अदालत से एमएमआरडीए मैदान में किराए की छूट के लिए गुहार लगाई गई थी। टीम अन्ना के अनशन के लिए जागृति मंच ने यह याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने यह कहा कि किराये में छूट के लिए मैदान अथॉरिटी को आदेश नहीं दे सकते।
इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट ने टीम अन्ना से सवाल किया था कि अगर रामलीला मैदान उपलब्ध है तो आप वहां अनशन क्यों नहीं करते । हाईकोर्ट ने सवाल किया कि क्या आपके आंदोलन का संसद के कामकाज पर असर नहीं पड़ेगा । उसने कहा कि जिस समय संसद लोकपाल विधेयक पर विचार कर रही है उस समय विधेयक के लिए समानांतर प्रचार या बहस करने को अनुमति नहीं दी जा सकती । कोई नहीं जानता कि इसका स्वरूप और विशेषताएं क्या होंगी। क्या ऐसी स्थिति में सार्वजनिक बहस की अनुमति दी जानी चाहिए?
बंबई हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को निर्देश देने की मांग संबंधी टीम अन्ना की याचिका खारिज करते हुए कहा कि अदालत यह फैसला नहीं कर सकती है कि आंदोलन जनहित में है या राजनीति से प्रेरित है। अदालत ने यह भी कहा कि वह सरकार को आजाद मैदान में बंद क्षेत्र के दरवाजे खोलने का निर्देश नहीं दे सकती। जिसके लिए भी टीम अन्ना ने 27 दिसंबर से अनशन की इजाजत मांगी है।
शुक्रवार को बॉम्बे हाईकोर्ट ने टीम अन्ना की अर्जी पर सुनवाई करते हुए कहा है कि एमएमआरडीए मैदान के किराए में राहत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने साफ कर दिया कि आंदोलन के किराए में छूट नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने टीम अन्ना से पूछा कि आखिर मुफ्त में आंदोलन के लिए जमीन क्यों चाहिए।
न्यायमूर्ति पीबी मजूमदार और न्यायमूर्ति मृदुला भाटकर की खंडपीठ ने अन्ना के आंदोलन से जुड़े इंडिया अगेंस्ट करप्शन से संबद्ध जागरुक नागरिक मंच द्वारा दाखिल याचिका खारिज करते हुए कहा कि हम चिंतित हैं कि इस तरह के मामलों पर अदालत फैसला नहीं दे सकती। यह अदालत निर्णय नहीं ले सकती कि आंदोलन जनहित में है या राजनीति से प्रेरित। न्यायमूर्ति मजूमदार ने कहा कि यह नहीं कहा जा सकता कि याचिकाकर्ता एमएमआरडीए में एक राष्ट्रीय आयोजन करने जा रहे हैं, जिसके किराये में छूट की मांग की गई है।
अदालत ने कहा कि याचिका खारिज करने की एक वजह यह भी है कि याचिकाकर्ता एक पंजीकृत सामाजिक संगठन नहीं है जो कि एमएमआरडीए से छूट के लिए अनिवार्य शर्त है। याचिकाकर्ता के वकील महेंद्र घेलानी ने जब अदालत से कहा कि वे एक पंजीकृत संगठन के माध्यम से एमएमआरडीए को एक अन्य आवेदन देंगे तो अदालत ने कहा कि वे ऐसा कर सकते हैं और प्राधिकरण इस पर विचार कर अपने विवेक से फैसला कर सकता है।
टीम अन्ना ने कोर्ट से मैदान के लिए ली जा रही फीस कम करने की मांग के सिलसिले में याचिका दायर की थी। टीम अन्ना एमएमआरडीए मैदान पर अनशन करना चाहती है। एमएमआरडीए मैदान के लिए टीम अन्ना को किराए के तौर पर 11 लाख 31 हजार 678 रुपये चुकाने होंगे। इसमें 10।03 फीसदी का सर्विस टैक्स भी शामिल है।
टीम अन्ना के लिए कुल मिलाकर 19 लाख रुपये बैठती है। लेकिन टीम अन्ना इतना किराया देने को राजी नहीं और उसने बॉम्बे हाईकोर्ट में अर्जी देकर किराया कम करने की मांग की थी।
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