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Thursday, 22 March 2012

नार्वे मामला: भारत ने रोकी कूटनीतिक पहल

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नार्वे मामला: भारत ने रोकी कूटनीतिक पहल
क्लीन मीडिया संवाददाता 

नई दिल्ली: 22 मार्च: (सीएमसी)  नार्वे में प्रवासी भारतीय दम्पति से अलग किए गए बच्चों के मामले में नया मोड़ आने के बाद भारत ने अपने राजनयिक की ओस्लो यात्रा फिलहाल रोक दी है। मीडिया की रिपोर्ट में कहा गया है कि बच्चों के पिता अपनी पत्नी से अलग होना चाहते हैं जबकि पिता ने इन रिपोर्ट को खारिज किया है।
विदेश मंत्रालय में राज्य मंत्री प्रनीत कौर ने संसद भवन के बाहर पत्रकारों से कहा, बच्चों को वापस भारत लाने के लिए सरकार ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया है ताकि वे अपना यहां अपना भविष्य बना सकें। लेकिन अब मामले में एक नई बात सामने आ गई है। इसमें हम हस्तक्षेप नहीं कर सकते।
उन्होंने कहा, संयुक्त सचिव की नार्वे यात्रा स्थगित कर दी गई है। कौर के मुताबिक सरकार अगला कदम उठाने से पहले मामले को देखेगी।
वहीं, विदेश सचिव रंजन मथाई ने कहा, नार्वे में स्थिति तेजी से बदल रही है। ब्योरों को नार्वे में सत्यापित किया जा रहा है।
ज्ञात हो कि अनुरूप और सागरिका के दोनों बच्चे अभिज्ञान (3) एवं एश्वर्या (1) मई 2011 से नार्वे की बाल कल्याण संस्था की देखरेख में हैं। अधिकारियों को लगा था कि बच्चों के अभिभावक उनकी उचित देखभाल नहीं कर पा रहे हैं।
इस बीच, मीडिया में रिपोर्ट आईं कि अनुरूप भट्टचार्य अपनी पत्नी सागरिका की मानसिक बीमारी की वजह से परेशान होकर तलाक लेने की बारे में सोच रहे हैं। अनुरूप ने हालांकि, इन रिपोर्ट को बेबुनियाद बताया।
अनुरूप ने बताया, घर में कुछ विषम परिस्थितियां हो सकती हैं और मैं इससे इंकार नहीं कर रहा हूं। इसका मतलब यह नहीं कि हम अलग होने अथवा तलाक लेने जा रहे हैं। मैं यह सुनकर सदमे में हूं।
अनुरूप के पिता अजय भट्टाचार्य ने मंगलवार को आरोप लगाया कि उनका पुत्र अपनी पत्नी से कानूनी रूप से अलग होने के बारे में विचार कर रहा है क्योंकि उसकी पत्नी को सिजोफ्रेनिया का गम्भीर रोग है।
उल्लेखनीय है कि भारत सरकार के हस्तक्षेप पर नार्वे दोनों बच्चों को उनके चाचा को सौंपने के लिए सहमत हो गया था। इस बीच, मामले को जल्द सुलझाने के लिए भारत ने विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) मधुसूदन गणपति को नार्वे भेजा था।  

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